पुरुआ चम्पारण भोजपुरिया लोक उत्सव

भोजपुरी कवि सम्मेलन सह सांस्कृतिक कार्यक्रम

10 नवंबर 2018 (दोपहर 2 बजे से)

स्थान: गणेश महावीर उच्च विद्यालय, रामगढ़वा, पूर्वी चम्पारण (बिहार)

पुरुआ के बारे में

कवनो मानव समाज के पहिला पहचान, भाषा होखेला। भाषा रउरा रहन–सहन, खान–पान, संस्कृति संस्कार के परिचय देले।

भोजपुरिया समाज बहुत दिन उपेक्षा के शिकार रहल बा। जबकि देश के बनावे में भोजपुरिया लोगन के बहुत बड़ योगदान बा। एगो साधारण मजदूर से लेके राष्ट्रपति तक भोजपुरिया समाज शुरू में ही ए देश के देले बा।

हमनी के अपना भाषा के हीन भावना से काहें देखत बानी जा? एकरा पर बहुत लंबा, कई तरह से चर्चा हो सकेला। लेकिन सवाल ई बा कि हीन भावना से बाहर निकले खातिर हमनी के का करत बानी जा।

पुरुआ… एही कुल सोच से जनमल एगो संगठन बा जवना में दुनिया भर के नवहा भोजपुरिया लोग अपना क्षमता के हिसाब से तन, मन, धन, बुद्धि, कौशल से भोजपुरी के गौरव के सभका सामने राखे चाहत बा।

बरिसन पहिले हमनी के पूर्वज ट्रिनिडाड, टुबैगो, मारीशस, सूरीनाम, अंडमान में सजा काटे गइलें। अंगरेजन के अत्याचार रहे। लेकिन अपना जीवटता से ओ सब जगह के लोग विकसित सभ्यता वाला जगह बना दीहल।

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